महंगाई का डबल अटैक: सरसों तेल ₹200 के पार, अब साबुन और शैंपू के लिए भी ढीली करनी होगी जेब

आम आदमी की रसोई से लेकर बाथरूम तक, अब हर जगह महंगाई की मार पड़ने लगी है। पटना और आसपास के इलाकों में रोजमर्रा की जरूरतों की चीजों के दाम अचानक से बढ़ गए हैं। हालात यह हैं कि सरसों का तेल अब 200 रुपये प्रति लीटर का आंकड़ा पार कर चुका है। सिर्फ खाने का सामान ही नहीं, बल्कि अब साबुन, सर्फ और ब्यूटी प्रोडक्ट्स की कीमतों में भी भारी इजाफा देखने को मिल रहा है।

क्या है पूरा मामला?

हालिया रिपोर्टों के अनुसार, पाम ऑयल, ग्लिसरीन और पैकेजिंग के सामान की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसी वजह से एफएमसीजी (FMCG) यानी रोजमर्रा के इस्तेमाल वाली चीजें बनाने वाली कंपनियों ने अपने दाम बढ़ाना शुरू कर दिया है। कारोबारियों का कहना है कि अगर कच्चे माल की कीमतें जल्द कम नहीं हुईं, तो आने वाले दिनों में आम जनता की जेब पर बोझ और ज्यादा बढ़ सकता है।

सरसों और खाद्य तेलों के नए दाम

बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है। अलग-अलग ब्रांड्स के तेल की कीमतें अब आसमान छू रही हैं। नीचे दी गई टेबल से आप समझ सकते हैं कि इस समय बाजार का क्या हाल है:

प्रोडक्ट/ब्रांड पुरानी/औसत कीमत ताजा कीमत (रुपये में)
750 ग्राम सोया तेल --- 145 रुपये
धारा (Dhara) ब्रांड तेल --- 180 रुपये
सलोनी (Saloni) तेल --- 180 रुपये
पतंजलि (Patanjali) तेल --- 200 रुपये
इंजन (Engine) ब्रांड तेल --- 205 रुपये

पाम ऑयल और ग्लिसरीन ने बढ़ाई टेंशन

पिछले तीन महीनों में पाम ऑयल की थोक कीमतों में 12 से 18 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। जो पाम ऑयल पहले 92 से 95 रुपये प्रति किलो मिलता था, वह अब 112 रुपये तक पहुंच गया है। इसका सीधा असर साबुन, शैंपू और हैंडवॉश बनाने वाली कंपनियों पर पड़ा है क्योंकि उनकी उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है।

यही हाल ग्लिसरीन का भी है। ग्लिसरीन की कीमत 65 रुपये से बढ़कर 82 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इसकी वजह से चेहरे पर लगाने वाली क्रीम, फेसवॉश और अन्य कॉस्मेटिक सामान भी महंगे हो गए हैं।

पैकेट छोटे कर रही हैं कंपनियां

महंगाई से निपटने के लिए कंपनियां एक खास तरीका अपना रही हैं, जिसे 'श्रिंकफ्लेशन' कहा जाता है। कंपनियां सामान की कीमत तो वही रख रही हैं, लेकिन पैकेट के अंदर की मात्रा कम कर दे रही हैं। यानी आपको उसी दाम पर अब कम सामान मिल रहा है। बिस्कुट, नमकीन और साबुन के पैकेटों में यह बदलाव साफ देखा जा सकता है।



महंगी पैकेजिंग का भी पड़ रहा असर

  • प्लास्टिक ग्रैन्यूल के दाम में 8 से 10 प्रतिशत की तेजी आई है, जिससे बोतलें और डिब्बे महंगे हो रहे हैं।
  • कार्टन और पेपर पैकेजिंग सामग्री भी लगभग 12 प्रतिशत तक महंगी हो गई है।
  • रैपर और पैकेट बनाने का खर्च बढ़ने से कंपनियों पर अतिरिक्त दबाव है।

आम जनता की क्या है प्रतिक्रिया?

"जो गोल्ड फेस किट पहले 350 रुपये में मिल जाती थी, उसकी कीमत अब 400 रुपये के पार चली गई है। घर का बजट संभालना अब बहुत मुश्किल होता जा रहा है।" - प्रियंका सिंह, स्थानीय निवासी

निष्कर्ष

फिलहाल राहत के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। जानकारों का मानना है कि आने वाले कुछ हफ्तों में बिस्कुट, साबुन और सर्फ की कीमतों में 5 से 10 प्रतिशत तक की और बढ़ोतरी हो सकती है। महंगाई की इस चौतरफा मार ने मध्यमवर्गीय परिवारों के घरेलू बजट को पूरी तरह से बिगाड़ दिया है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाने के लिए क्या कदम उठाती है।

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